बी डी त्रिपाठी

Month: June 2019

यह लोकसभा 2019 का चुनाव मेरे लिए झूठ और जुमलेबाजी के प्रतिकार का चुनाव है

यह लोकसभा 2019 का चुनाव मेरे लिए झूठ और जुमलेबाजी के प्रतिकार का चुनाव है ।  यह चुनाव देश में बढ़ती सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक असुरक्षा के खिलाफ लामबंदी का चुनाव है, यह चुनाव इस देश की जनता को यह याद दिलाने का चुनाव है कि किस प्रकार से सरकार बनते ही भाजपाई नेता अपने वादों-इरादों, घोषणा पत्र में कही बातों को, चुनावी जुमला बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं और आम जनता ठगी सी, आंखें फाड़े हुए बेबसी के साथ सब कुछ सुनती सहती रहती है, आज धोखेबाज नेताओं से हिसाब बराबर करने का चुनाव है ।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद तथाकथित योगी, आदित्यनाथ ने सबसे पहले अपने ऊपर लगे दर्जनों आपराधिक मुकदमे वापस ले लिए थे, यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सरकार ने साजिशन देश की नवरत्न कंपनियों का बेड़ा गर्क कर के निजी स्वामित्व वाली कंपनियों को लाभ पहुंचाया,
रेलवे, ओएनजीसी, बीएसएनल , आरबीआई, सीबीआई, इंडियन एयरलाइंस, सब की स्वायत्तता, संप्रभुता, आर्थिक बल, नष्ट कर दिया।

भारत के वरिष्ठ राजनेताओं की यह चिंता नाहक नहीं है कि यदि यह सरकार दोबारा आई तो भारत दूसरा पाकिस्तान बन जाएगा।  आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी देश के संघीय और सेकुलर ढांचे को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों के खिलाफ है ।
  देश की वर्तमान नीतियों से अमीर और अमीर बनता जा रहा है गरीब और गरीब होता जा रहा है, असमानता और असंतुलन के बढ़ने से देश में उग्रता , अविश्वास, और असहिष्णुता बढ़ रही है, देश का नौजवान गुमराह हो रहा है और यह सब सरकार की
तुगलकी-तानशाही नीतियों का परिणाम है ।
सरकार की सैन्य नीति, सरकार की अर्थनीति, विदेशनीति सब फेल हो चुकी है, अपने ही देश के सिपाहियों-कमांडोज की शहादत पर, सरकार, राजनीति की रोटी सेक रही है, भय और असुरक्षा की गहराते माहौल में देश में आत्महत्या की दर में खतरनाक इजाफा हुआ है, सच्ची और आदर्श युक्त नीतियों और विचारों से ही आदर्शवादी भारत का निर्माण किया जा सकता है, इसलिए सभी सुधी जनों को एक होकर कदम बढ़ाना होगा ।
यह देश संभावनाओं का देश है और यहां की विविधता की वजह से किसी ठीक-ठीक सर्वमान्य नतीजे पर पहुँच पाना असंभव है फिर भी मैनें पूरे साहस से आसमान की ओर कंकड़ उछाला है हश्र क्या होगा देखा जायेगा, जनसामान्य के लिये सबसे ज्यादा दिनों तक अनशन पर रहनें वाली मणिपुर की स्वनामधन्य नेता इरोम शर्मिला को मणिपुर विधानसभा चुनाव में कुल 90 वोट मिले थे मेरा कहना है की इसमें इरोम शर्मिला की क्या त्रुटि थी उनके सापेक्ष मेरा संघर्ष नगण्य है, न कुछ है, हम लड़नें वाले लोग हैं, डंटे हैं, अड़े हैं, कह रहे हैं, बता रहे हैं, अपने सीनें पर कोई बोझ नहीं है की हमनें अपना प्रयास नहीं किया, आगे जनता जनार्दन है उनकी इच्छा मै सब प्रकार की परिस्थितियों का सामना करनें के लिये तैयार हूँ ।
धन्यवाद
जय हिंद जय भारत 
(कुछ पत्रकार जनों के यह पूछनें पर की “आप इस लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं तो आखिर इस चुनाव को आप किस दृष्टि से देखते हैं आखिर आप की दृष्टि में आपका यह चुनाव किस परिणीति को प्राप्त होगा इस पर कुछ बोलिये” के जवाब में मेरा कथन)

आखिर बीजेपी पहले से ज्यादा बहुमत में कैसे आयी -?

आखिर बीजेपी पहले से ज्यादा बहुमत में कैसे आयी -? इस सवाल के जवाब में आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी के श्रीमान राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेलौस बोल-:

बेहिसाब पैसे के बल पर खड़े किये गये प्रचार तंत्र के बल पर जीत हांसिल की गयी है, चुनाव आयोग का निराला नियम है की पार्टियों के खर्च पर कोई पाबन्दी नहीं है, इस नियम की आड़ में बीजेपी हर सीट पर बेहिसाब पैसा खर्च कर रही थी, अकेले वाराणसी में पीएम मोदी के लिये उनकी पार्टी ने 550 करोड़ से ज्यादा खर्च किया होगा, बीजेपी के मुकाबले सभी पार्टियों के पास खर्च करने के लिये दसवाँ हिस्सा भी नहीं था, चौथे चरण का चुनाव प्रचार बंद होने के बाद, विपक्षी दलों के स्टार प्रचारकों को हेलीकॉप्टर मिलना संभव हो पाया, आमजन की छोड़ दीजिये, स्वयं पार्टी कार्यकर्ता जनों का मिजाज ऐसा है की प्रचुर मात्रा में जेब खर्च मिले, तब वे उत्तरदायित्व का निर्वहन करना चाहते हैं, अन्यथा कन्नी काटते हैं, बहाना बनाते हैं की वे अपने निजी कार्य में व्यस्त हैं, स्पष्टतया तुलना करते हुये कहते हैं की बीजेपी में तो इतना मिल रहा है ! बिना पैसा के चुनाव न हो पायेगा !
अब दूसरी समाजशाष्त्रीय बात जानिये-:
कथनी-करनी में अंतर के चलते पिछले एक दशक में सवर्णों में आरएसएस की स्वीकार्यता घटी है, कुछ महत्वाकांछी और व्यावसायिक वृत्ति वाले सवर्णों (अथवा वे जिनका शाशन-प्रशाशन से प्रत्यक्ष-परोक्ष हित जुड़ा हुआ है) को छोड़ दें तो आम पढ़ा लिखा सवर्ण ओपन माइंडेड और लिबरल हुआ है, अब वो आरएसएस के झांसे और बहकावे में नहीं फंसता, पिछले 05 वर्षों की पूर्ण बहुमत वाली सत्ता में पॉवर और पैसे के बल पर आरएसएस नें अपना कार्यक्षेत्र गाँवों की ओर बढ़ा लिया है, बातचीत में वे अब अपनी “जी” लगानें वाली लोकलुभावन शैली से पिछड़े और दलित वर्ग के लोगों को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं, और जिस कारण वो भोला-भाला दलित और पिछड़ा वर्ग जिसे “जी” का मनमोहक सम्बोधन मिल रहा है, जरूरत पड़ने पर सुविधा भी उपलब्ध हो रही है, वो इनके भ्रम जाल का आसान शिकार है, उसे समझाकर ब्रेनवॉश कर दो की भारत की धरती पर सारी समस्याओं की जड़ मुसलमान ही हैं, उस संघी बन चुके दलित और पिछड़े वर्ग को जब अपनी जाति – बिरादरी का व्यक्ति जीतता हुआ नहीं दिखाई देता तब वो आरएसएस और बीजेपी की पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को वोट कर देता है.

तीसरा कारण है दूषित मतदान प्रक्रिया और गणना प्रक्रिया -:

एक लोकसभा क्षेत्र में सत्ता धारी दल के प्रत्याशी अथवा धनबली-बाहुबली प्रत्याशी को छोड़ दिया जाये तो कोई भी प्रत्याशी 40% बूथों से अधिक पर “प्रबंधन” कर ही नहीं सकता और इस अनदेखी का फायदा पैसे और संगठन के बल पर आरएसएस उठा रही है, पोलिंग पार्टियां जब दूरदराज के बूथों पर पहुँचती हैं तो उनके आराम-आनंद और आवाभगत का पता लगाइये सब पहले से पैसे और पॉवर वाले प्रत्याशी की ओर से मैनेज हुआ रहता है, जो थोड़े मुखर नौजवान होते भी हैं उन्हें पुलिस भय दिखाया जाता है या अन्त में यह कहकर चुप करा दिया जाता है की “नेतवन तौ जीतय-हारय के बाद मिलिहैं न, हमय- तुहैंय तौ साथय रहैक है, काहें नरक मचाय हौ एक यही बूथ से तौ जीत हार होई न” इस कारण वो एक आदमी भी पोलिंग स्टेशन से दूर चला जाता है।
गणना प्रक्रिया के बारे में बताऊं की – जिस EVM में बूथ पर वोट पोल हुये थे उसी EVM की गिनाई हो रही है या कोई और EVM गणना के लिए सामनें कर दी गयी है इसका पता नहीं लग पाता शुरू में तो कुछ के मिलान बोलकर बताये जाते हैं लेकिन पहले ही राउंड के बाद सब राम भरोसे हो जाता है चुनाव अधिकारी खुद अपने हाथों से 5 ईवीएम एक लाइन से उठाकर गिन देता है, ईमानदारी की बात ये है की वे कर क्या रहे हैं यह भी समझ में नहीं आता, साथ में RO होता था, एजेंट को छूने नहीं देते, वी वी पैट पर्चियों वाली मशीनों की काउंटिंग सबसे अंत में कराई गयी , जब मजबूत दलों के प्रत्याशियों को प्राप्त मतो का अन्तर बढ़ने लगा, तो एक-एक कर वे और उनके समर्थक मतगणना स्थल से बाहर चले गये, छोटे दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों और उनके एजेंट्स की कोई सुनवाई नहीं होती, (आखिर वे आपस में भी एक दुसरे खिलाफ प्रतिद्वंदी ही होते हैं) और उनसे मनमानें तौर पर हस्ताक्षर करा लिये जाते हैं।
जो शिकायतें आदि होती भी हैं वे अखबारों के किसी कोनें में जाती हैं, क्योंकि जीतने वाला ही बड़ा है अंत में केवल इतना कहूंगा की पूरा-पूरा तंत्र ही दूषित है…….. ( आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी वेबसाइट- https://www.aadarshwadisandesh.in पार्टी अध्यक्ष की वेबसाइट- https://www.bdtripathi.com )

यदि मैं एआईसीसी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होता तो क्या करता

23 मई 2019 को चुनाव परिणाम आने के बाद की जाने वाली प्रेस कान्फ्रेंस में उन सभी मतदाताओं के प्रति आभार व्यक्त करता, जिन्होंने देश में फैले कांग्रेस और नेहरू-गांधी विरोधी अफवाहों के बावजूद कांग्रेस के पक्ष में. कांग्रेस समर्थित वा घोषित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया, उनसे यह भी कहता की आपके सहृदयी सहयोग के बावजूद भले ही हम या हमारी पार्टी जीत ना पाई हो लेकिन हम आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, विपक्ष में रहकर भी सरकार की जनविरोधी नीतियों के पक्ष में, आवाज उठाएंगे, लड़ाई लड़ते रहेंगे ।
राफेल विमानों की खरीद फरोख्त में हुआ घोटाला हो या देश की वित्तीय संस्थाओं और नवरत्न कंपनियों की बर्बादी और बेजा इस्तेमाल, इन सभी मुद्दों पर चुप नहीं बैठेंगे, और जनता के बीच सच उजागर हो सके, इसलिये लड़ाई लड़ते रहेंगे ।
देश के गरीबों, मजदूरों, कामगारों और किसानों और देश की सारी मेहनतकश जनता के लिए, महिला अधिकार, मानवाधिकार के लिए कांग्रेस पार्टी का जमीनी संघर्ष जारी रहेगा ।
EVM से सम्बंधित तमाम सारी शिकायतें पूरे देश से लगातार प्राप्त हो रही हैं, उन सभी तथ्यपरक घटनाओं के पूर्ण रूप से सामने आने के बाद पार्टी अपना पक्ष रखेगी।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईसीसी की पूर्ण दिवसीय जनरल मीटिंग की दिन तारीख समय घोषित कर, कहता कि पार्टी के सभी स्तर के पदाधिकारीगण, अगले किसी निर्णय तक, जहां हैं बने रहेंगे, काम करते रहेंगे, कहां चूक हुई है इसका मंथन हम सब मिल बैठकर साथ-साथ करेंगे, किसी अधीरता की जरूरत नहीं है । अगले निर्देश तक सभी पार्टी जन पार्टी सम्बंधित बयानबाजी और पार्टी का पक्ष रखनें जैसी गतिविधियों से दूरी बना कर रखें

इसके बाद तुरंत बाद गृह क्षेत्र अमेठी की यात्रा के लिए रवाना हो जाता 23 तारीख की पूरी रात और 24 तारीख को पूरा दिन अमेठी के लोगों से मिलकर, धैर्य ना खोनें और आगे संघर्ष करने की सलाह देता । जिन लोगों ने वोट दिया, साथ रहे, मेहनत किया, उनका आभार जता कर धन्यवाद देता और कहता कि निराश होने की जरूरत नहीं है कुछ अपने ही लोग नाराज हुए हैं उनसे संवाद कीजिए परस्पर मेलजोल बढ़ाइए उनकी शिकायतों को दूर कीजिए अगले चुनाव में हम यह सीट दोगुने-चौगुनें अंतर से जीतेंगे ।
जिन्होंने वोट नहीं दिया उस वर्ग से, उस जनता से माफी मांगता कि, हमें खेद है कि हम आपकी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके, आप मेरे हैं, मेरे परिवार के हैं, मेरे दिल से आपको कोई नहीं निकाल सकता, जब भी जरूरत हो, मुझसे पहले की तरह ही मिल सकते हैं, बात कर सकते हैं, मैं आपके साथ था, हूं, और रहूंगा ।
24 तारीख को देर रात दिल्ली आकर अन्य संदेशों, चिट्ठियों, मंत्रणा, को निपटाता – जवाब देता और 25 मई को गुजरात अग्निकांड के शिकार हुए परिवारों से मिलता, उनके परिवारों के साथ, उनके दुख में संबल देता, दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले दोबारा पूरे देश में कहीं भी ऐसे हादसे ना हो, इसके लिए सभी जरूरी कार्यवाहियों की घोषणा करते हुए आपेक्षित कदम उठाता ।
25 26 27 मई 3 दिन दुखी परिवारों के बीच बिताकर 28 मई की सुबह-सुबह केरल में अपने चुनाव क्षेत्र वायनाड पहुंचता और वहां की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पर्याप्त समय देने के बाद केरल की अन्य जगहों पर समय देता, आने वाले समय में केरल के लिए अपने कुछ निश्चित कार्यक्रम व गतिविधियों की घोषणा करता, 28 और 29 मई 2 दिन केरल में बिताकर 30 मई कि सुबह दिल्ली आकर नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेता , कार्यक्रम के निमित्त अपने आवश्यक कर्तव्य अनुपालन के उपरांत 30 मई की शाम पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हो जाता ।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व अन्य नेताओं पार्टी कार्यकर्ता जनों से मुलाकात के साथ-साथ पश्चिम बंगाल चुनावी हिंसा में हताहत हुए और प्रभावित हुए परिवारों से मिलता और यह कहता कि, अत्याचारों की परवाह किए बिना गांधी-नेहरू के बनाए और बताए हुए सच्चाई के रास्ते पर चलते रहना है, मानवता की भलाई के लिए काम करते रहना है, जोर, जुल्म और जुमलों के खिलाफ तने रहना है, खड़े रहना है, लड़ते रहना है।
2 जून देर शाम तक का समय पश्चिम बंगाल में बिताने के बाद दिल्ली आकर अन्य संदेशों, चिट्ठियों, मंत्रड़ाओं को निपटाता – जवाब देता, और 3 जून की दोपहर तमिलनाडु के लिए रवाना होता ।
तमिलनाडु में नेताओं, पार्टीकार्यकर्ता जनों से मिलकर, समय बिताने के बाद, 5 जून की देर शाम पुनः दिल्ली वापस आकर अन्य संदेशों, चिट्ठियों, मंत्रणाओं को निपटाता, जवाब देता और आगे 9 जून को होने वाली एआईसीसी की पूर्ण दिवसीय जनरल मीटिंग (जिसकी घोषणा 23 मई को सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जा चुकी थी) की रूपरेखा और तैयारियों के बारे में जानकारी लेता, आवश्यक निर्देश देता। कमियां पकड़ता और उनमें सुधार करता और 9 जून की महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए सभी मसौदों का परीक्षण, पुननिरीक्षण आदि में व्यस्त रहते हुए, अपरिहार्य दायित्वों का निर्वहन करता रहता ।
9 जून को होने वाली दो दिवसीय जनरल मीटिंग में चर्चा विमर्श के बाद बिंदुवार फैसले लिये जाते की-:
(01)-: 3 या 4 महीने के भीतर एआईसीसी का महाधिवेशन मध्यप्रदेश में आयोजित किया जाएगा ।
(02)-: कांग्रेस पार्टी की सदस्यता के लिए प्रावधानों में अपेक्षित बदलाव किया जाएगा ।
(03)-: पार्टी के किसी भी स्तर के पदाधिकारी के लिए यह जरूरी प्रावधान अमल में लाया जाएगा कि उसके कार्य क्षेत्र के निमित्त निर्धारित किये गये एकमुश्त योगदान राशि (वार्षिक रूप से ) पार्टी खाते में जमा करें । इसी प्रकार हर माह प्रकाशित होनें वाला पार्टी मुखपत्र कांग्रेस सन्देश खरीदना अनिवार्य
(04)-: पार्टी के किसी भी स्तर के पदाधिकारी के पास अपनी 11 सदस्यीय वैयक्तिक किचेन कैबिनेट होना अनिवार्य है ( वैयक्तिक किचन कैबिनेट में शामिल होने के लिए यह जरूरी है की वह कांग्रेस पार्टी की रीतियों – नीतियों – विचारों और कार्यक्रमों से सहमति रखता हो किंतु पार्टी संगठन में किसी भी स्तर पर जिम्मेदार पद पर न हो पार्टी का सदस्य है या नहीं यह उसकी इच्छा और उससे जुड़े अन्य मानदण्डों और परिस्थिति पर निर्भर करता है )
(05)-: 09 जून से लेकर 10 अप्रैल 2020 तक पूरे भारत देश के हर एक ब्लॉक में (न्यूनतम 650 स्कवायर फिट का दो मंजिला अथवा क्षमता अनुसार ) कार्यालय खोले जानें की घोषणा
(06)-: वरिष्ठ महासचिव और संगठन मंत्री के पद पर मणिशंकर अय्यर जी को जिम्मेदारी श्रीमती प्रियंका गाँधी की छुट्टी करते हुये उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर उनकी नियुक्ति इसी प्रकार महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राजबब्बर जी की नियुक्ति रणदीप सुरजेवाला की हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष पर नियुक्ति, . . . . . . . . . . . की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति
(07)-: पार्टी के सभी स्तर के पदाधिकारियों के वर्ष भर के कार्यक्रम पूर्व निर्धारित हों यह प्रभावी नियमावली लागू करना।
(08)-: जब तक पार्टी देश की केंद्रीय सत्ता में गौरवमयी और जोरदार वापसी नहीं कर लेती तब तक किसी भी नेता पुत्र अथवा पुत्रियों (जिन्होंने पहले किसी भी चुनाव में भाग नहीं लिया है उनके लिए अर्थात जो चुनाव लड़ चुकें है उनपर यह बाध्यता आरोपित नहीं होगी) को चुनावी राजनीति का टिकट नहीं दिया जायेगा ।
(09)-: पार्टी के किसी भी पदाधिकारी के द्वारा किये जानें वाले सांगठनिक कार्यों यथा दौरा/मीटिंग/पर्यवेक्षण/ इत्यादि के निमित्त सब तरह की फिजूल खर्ची पर प्रभावी रोक
(10)-: पी एम पी क्षमता वाले व्यक्तियों को तरजीह देने वाला मसौदा लागू हो
(11)-: देश की प्रत्येक लोकसभा में ओ एच जी की नियुक्ति वाली कार्ययोजना को अमली जामा वाला मसौदा लागू करने पर बल
(12)-: जिन राज्यों में आगामी वर्ष में विधान सभा चुनाव हैं वहाँ अगले 120 दिनों में एक सौ बीस हजार नये मेंबर बनाना प्रदेश अध्यक्षों के लिये अनिवार्य
(13)-: जनता से जुड़ी समस्याओं शिकायतों के लिये केंद्रीय स्तर पर कार्ययोजना लागू करने के मसौदे को लागू करनें पर बल
(14)-: देश के किन्हीं भी कम-से-कम क्रमशः 07 जिलों में प्रत्येक माह जनता संवाद का कार्यक्रम निर्धारित, दिल्ली में प्रत्येक पखवारे कम-से-कम एक जनता दरबार सुनिश्चित
(15)-: देश में किसी भी स्तर की कोर्ट पर कम-से-कम तीन अधिवक्ताओं के निःशुल्क पैनल की घोषणा जो स्थानीय स्तर पर किसी भी जनविरोधी मामले को सक्षम कार्यवाहियों की जद में लानें में सक्षम हों
मै न तो दागदार हूँ न ही किसी अपराध में लिप्त हूँ, मेरी सच्चाइयां ही मेरा पथ-प्रदर्शित करतीँ और इस तरह तीस महीना बीतते-बीतते सरकार के ऊपर लगे सारे आरोप सिद्ध हो जाते, सरकार अपने अन्तरविरोध में इस तरह फंस जाती की सफाई देनें लायक न रहती, इनके सारे मुखौटे उतर जाते और जनता जनार्दन के सामने इनका बदरंग-कुरूप और वास्तविक चेहरा सामनें आ जाता
(उपरोक्त पोस्ट पंजीकृत राजनीतिक दल आदर्शवादी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान बृजेन्द्र दत्त त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी है जिनकी वेबसाइट- https://www.bdtripathi.com है पोस्ट का मकसद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं है )

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